जल, जीवन और जमीन के संरक्षण के लिए वृक्षारोपण आवश्यक : डॉ. ए.के. द्विवेदी

मधुबनी (बिहार) से आए अप्लास्टिक एनीमिया पीड़ित बालक के परिजनों ने किया वृक्षारोपण

इंदौर, ४ जून, विश्व पर्यावरण दिवस के एक दिन पूर्व मधुबनी (बिहार) निवासी श्री प्रमोद साहनी एवं श्री सरोज साहनी अपने अप्लास्टिक एनीमिया (बोन मैरो की गंभीर बीमारी) से पीड़ित बच्चे के उपचार हेतु इंदौर स्थित एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर एवं होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ए.के. द्विवेदी के साथ जामुन एवं बेल के पौधों का रोपण किया।

इस अवसर पर डॉ. ए.के. द्विवेदी ने कहा कि जल, जीवन और जमीन का संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वृक्ष वर्षा को आकर्षित करने, भूजल स्तर बनाए रखने, मिट्टी के कटाव को रोकने तथा वातावरण को शुद्ध रखने में सहायक होते हैं। यदि धरती पर हरियाली बनी रहेगी तो जल स्रोत सुरक्षित रहेंगे, भूमि की उर्वरता बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण प्राप्त होगा। इसलिए प्रत्येक नागरिक को प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करने का संकल्प लेना ही चाहिए।

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि बेल का वृक्ष धार्मिक एवं औषधीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा पेट संबंधी विकारों में लाभकारी माना जाता है। वहीं जामुन मधुमेह नियंत्रण में उपयोगी औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने नागरिकों से पीपल, बरगद, नीम, बेल, आंवला एवं आम जैसे वृक्ष लगाने तथा प्रत्येक परिवार में तुलसी का पौधा लगाने का आग्रह किया।

प्रमोद साहनी ने बताया कि उन्हें बिहार के डॉ. नरेश जी द्वारा उपचार हेतु डॉ. ए.के. द्विवेदी के पास भेजा गया था। इंदौर में उन्हें घर जैसा वातावरण एवं आत्मीय सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि डॉ. द्विवेदी की सलाह पर बच्चे के पोषण हेतु मछली सेवन पर भी चर्चा हुई, जिसके दौरान उन्होंने अपने मछली पालन व्यवसाय की जानकारी साझा की।

श्री साहनी ने बताया कि केंद्र एवं राज्य सरकारों की योजनाओं और प्रशिक्षणों से प्रेरित होकर वे सफलतापूर्वक मत्स्य पालन कर रहे हैं तथा अन्य लोगों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने डॉ. ए.के. द्विवेदी एवं उनकी टीम द्वारा मानव सेवा और मरीजों की देखभाल के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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